UP में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, 1 सितंबर से शुरू होगा कार्यक्रम 

UP में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, 1 सितंबर से शुरू होगा कार्यक्रम 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान और उनकी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से यह प्रशिक्षण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शुरुआती स्तर पर पहचानना, उनकी जरूरतों को समझना और समय पर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि यदि बच्चों की जरूरतों की पहचान समय रहते हो जाए तो उनकी शिक्षा और विकास के लिए बेहतर व्यवस्था की जा सकती है।

75 जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षक भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशिक्षण में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप और उनके लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जाएगी। गतिविधि आधारित और व्यावहारिक तरीकों के माध्यम से प्रशिक्षण को आसान और उपयोगी बनाने पर जोर रहेगा।

30 अगस्त तक तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर

प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने से पहले 30 अगस्त तक जिला स्तर पर एआरपी को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद यही मास्टर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना और सभी प्रतिभागियों तक जरूरी जानकारी पहुंचाना है।

प्रशिक्षण के लिए करीब 2.98 करोड़ रुपये की सीमा

राज्य परियोजना निदेशालय ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब 2.98 करोड़ रुपये की वित्तीय सीमा निर्धारित की है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए लगभग 17.70 लाख रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए करीब 2.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। विभाग के अनुसार, इस प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शुरुआती अवस्था में ही उचित सहयोग देने की व्यवस्था और मजबूत हो सकती है।

ब्लॉक स्तर पर 1 से 30 सितंबर तक चलेगा प्रशिक्षण

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण 1 से 30 सितंबर के बीच ब्लॉक स्तर पर कराया जाएगा। दोनों स्तरों पर काम करने वाले कर्मियों को एक साथ प्रशिक्षण मिलने से आपसी समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण के दौरान को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शुरुआती जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही बच्चों के लिए समावेशी और सहयोगी शिक्षण वातावरण तैयार करने के तरीकों को भी समझाया जाएगा।

समय पर प्रशिक्षण पूरा कराने के निर्देश

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता बनाए रखने, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता सुनिश्चित करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रशिक्षण पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।प्रशिक्षण की प्रगति और इससे जुड़े आंकड़े राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मिलेगा शुरुआती सहयोग

इस प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और शुरुआती हस्तक्षेप को मजबूत करना है। इससे बच्चों की जरूरतों को शुरुआती स्तर पर समझकर उन्हें शिक्षा के लिए आवश्यक सहयोग देने में मदद मिल सकती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी शिक्षकों की भूमिका बच्चों के शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी क्षमता बढ़ने से समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर और बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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