शिक्षामित्र की फर्जी नियुक्ति, जांच के बाद भी बर्खास्तगी नही, पढ़िए पूरा मामला

शिक्षामित्र की फर्जी नियुक्ति, जांच के बाद भी बर्खास्तगी नही, पढ़िए पूरा मामला

संतकबीरनगर। जिले District के नाथनगर ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सुबखरी में एक शिक्षामित्र shikshamitra की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ईश्वर चंद्र पाण्डेय ने जिलाधिकारी से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।जांच में कूटरचित दस्तावेज document के आधार पर नियुक्ति होने का मामला आने पर बीएसए BSA ने शिक्षामित्र shikshamitra को निलंबित कर दिया था। दस माह mahine से अधिक समय के बाद भी नियुक्ति निरस्त नहीं हुई।

शिक्षामित्र की फर्जी नियुक्ति

आरोप है कि ममता तिवारी को वर्ष 2005-06 में ग्राम शिक्षा समिति के चयन के बिना ही शिक्षामित्र shikshamitra नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति कूटरचित दस्तावेज document के आधार पर हुई थी, जिसके बाद उन्हें सहायक अध्यापक AT पद पर भी नियुक्त कर दिया गया। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी information से पता चला कि ममता तिवारी के सभी प्रमाण पत्र राजस्थान बोर्ड से थे। जबकि शिक्षामित्र shikshamitra चयन के लिए उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। प्राथमिक विद्यालय सुबखरी में महिला शिक्षामित्र shikshamitra का कोई पद रिक्त नहीं था।

ग्राम शिक्षा समिति की चयन पंजिका में भी ममता तिवारी के चयन का कोई प्रस्ताव अंकित नहीं पाया गया। खंड शिक्षा अधिकारी BEO ने बताया कि नियुक्ति पत्र की प्रति भी उपलब्ध नहीं है, जिससे बिना नियुक्ति के ही कार्य लेने की बात स्पष्ट होती है। इन रिपोर्टों से अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्टों report में यह भी सामने आया कि ममता तिवारी द्वारा प्रस्तुत चयन प्रस्ताव की छाया प्रति कूटरचित है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी BSA ने जांच रिपोर्टों के आधार पर ममता तिवारी को निलंबित कर दिया था। हालांकि, दस माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें बर्खास्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से इस प्रकरण की अपने स्तर से जांच कराकर ममता तिवारी की नियुक्ति निरस्त करने और उनके विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

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